उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमन्त्री एवं वरिष्ठ राजनेता भुवन चंद खंडूड़ी के निधन पर तीन दिन का राजकीय शोक घोषित
देहरादून। लम्बे समय से बीमार चल रहे उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी के पिता भुवन चंद्र खंडूड़ी का आज निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पूरे राज्य से शोक की लहर है।

पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ राजनेता भुवन चंद खंडूड़ी के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तराखंड और देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया साथ ही प्रदेश में 3 दिन का राजकीय अशोक घोषित किया हैं । बुधवार को स्कूल और कॉलेज भी बंद रहेंगे ।
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार 19 मई 21 में तक समस्त सरकारी कार्यालयों में ध्वज आधा झुका रहेगा तथा इसकी अवधि में किसी भी प्रकार के शासकीय मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे ।

मुख्यमंत्री ने अपने शोक संदेश में कहा कि मेजर जनरल खंडूड़ी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन और समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में भी ईमानदारी, पारदर्शिता और सुशासन की मिसाल कायम की। उन्होंने उत्तराखंड के विकास को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए, जिनका लाभ आज भी प्रदेश को मिल रहा है।
2007 में उत्तराखंड में भाजपा की सरकार बनने के बाद भुवन चंद्र खंडूड़ी पहली बार मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल ‘जीरो टॉलरेंस’ और सख्त प्रशासन के लिए जाना गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी छवि इतनी मजबूत थी कि सरकारी मशीनरी तक में उनका नाम अनुशासन के प्रतीक के रूप में लिया जाता था।
हालांकि उनकी सख्ती कई नेताओं और विधायकों को असहज भी करती रही। 2009 लोकसभा चुनाव में भाजपा के खराब प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया, लेकिन पार्टी ने 2011 में फिर उन पर भरोसा जताया और दूसरी बार उन्हें मुख्यमंत्री बनाया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खंडूड़ी जी अपनी सादगी, स्पष्टवादिता और कार्यकुशलता के लिए सदैव याद किए जाएंगे। उन्होंने राजनीति में स्वच्छ छवि और जनहित को सर्वोपरि रखने की परंपरा को मजबूत किया। उनके नेतृत्व में उत्तराखण्ड में सुशासन और जवाबदेही को विशेष महत्व मिला, जिससे आम जनता के बीच उनकी अलग पहचान बनी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मेजर जनरल खंडूड़ी का निधन केवल उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति है। उनका संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए समर्पित रहा। उन्होंने युवाओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक तंत्र को सदैव ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा का संदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने तथा शोक संतप्त परिजनों, समर्थकों और शुभचिंतकों को इस असीम दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।
