मसूरी में धूमधाम से मनाया गया बसंत पंचमी का त्यौहार ।

दिनेश /
मसूरी । मसूरी में आज बसंत पंचमी का त्योहार सभी लोगों ने अपने-अपने घरों और मन्दिरों में पुजा अर्चनाकर पूरे रीति-रिवाज के साथ धूमधाम से मनाया गया । मां सरस्वति की ही कृपा से आज मसूरी में लगभग आधा फीट बर्फ गिरते हुए देखने को मिली जिसे देख स्थानीय लोग और मसूरी आये हुए पर्यटक खुशी से झूम उठे ।
बसंत पंचमी माघ शुक्ल पंचमी को मनाई जाती है और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस दिन विद्या, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा होती है। पीले वस्त्र, मिठाइयां और सरस्वती पूजा इसका मुख्य आकर्षण हैं।
बसंत पंचमी, जिसे वसंत पंचमी या श्री पंचमी भी कहा जाता है, भारत के सबसे रंग-बिरंगे और शुभ त्योहारों में से एक है। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है और हिंदू पंचांग के अनुसार माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है।
पहाड़ों की रानी मसूरी में बसंत पंचमी का पर्व पूरे धूमधाम से धार्मिक रीति रिवाज व पारंपरिक मान्यताओं के साथ मनाया गया। इस मौके पर लोगों ने घरों में मां सरस्वती की पूजा अर्चना की, वहीं मदिरों में भी पूजा अर्चना के साथ प्रसाद का वितरण किया गया।
बसंत पंचमी का पर्व जहां बसंत के आने पर मनाया जाता है वहीं इसका धार्मिक महत्व भी है। इस दिन मां सरस्वती का पदार्पण हुआ था। इस दिन को बसंत ऋतु की आगमन का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन लोग सरस्वती पूजन करते हैं और व्रत रखते हैं। यह हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से ये एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती का अवतरण हुआ था। इसीलिए हर वर्ष माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्माजी ने जब संसार का भ्रमण करते हुए यह महसूस किया कि हर दिशा मूक है, हर जगह खामोशी छाई हुए है तो उन्होंने अपने कमंडल से जल निकालकर छिड़का। इसके बाद एक ज्योतिपुंज से एक देवी का प्राकाट्य हुआ जिनका चेहरा तेजस्वी था और हाथों में वीणा थी, इस देवी का नाम ब्रह्माजी ने सरस्वती दिया। बसंत पंचमी के दिन ही मां सरस्वती प्रकट हुई थी इसलिए आज भी माघ शुक्ल पंचमी के दिन उनकी पूजा की जाती है।
बसंत पंचमी पर वैसे तो देवी सरस्वती की पूजा होती है, साथ ही इस दिन ही महादेव की भी पूजा होती है। हिन्दु धर्म में ही कई मान्यताओं के अनुसार ही लोगों का ऐसा भी मानना है कि
आज ही के दिन बसंत पंचमी पर आपने देखा होगा कि हर साल कई विवाह होते हैं। माना जाता है कि इस दिन पूरे दिन शादी हो सकती है। लेकिन, क्यों। तो, बता दें कि बसंत पंचमी का दिन सिर्फ देवी सरस्वती का ही नहीं बल्कि, महादेव का भी दिन है। दरअसल, मान्यता है कि इस दिन महादेव अपने योग मुद्रा से बाहर आ कर पार्वती जी से सगाई की थी। वहीं
शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी के दिन महादेव की तिलक की रस्म निभाई गई थी। माना जाता है कि माता पार्वती से शादी करने से पहले इस दिन उनकी सगाई हुई थी। माघ मास की पंचमी तिथि के दिन ही देवताओं द्वारा महादेव का तिलक किया गया था।
इसके बाद महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इस तरह जो भी व्यक्ति एक सुखद वैवाहिक जीवन जीना चाहता है, वो इस दिन महादेव की पूजा करता है।
बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा करने से भक्तों को ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जो लोग गायन, वादन, अभिनय आदि के क्षेत्र में हैं उनको भी मां सरस्वती की पूजा करने से लाभ प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति भी मां सरस्वती की पूजा करने से होती है। पर्व को मनाने के लिए मंदिरों में मां सरस्वती की पूजा करने के बाद प्रसाद वितरित किया गया।
