मां सरस्वती की कृपा से बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मसूरी में भारी हिमपात ।
दिनेश /
मसूरी- बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आज मसूरी में भारी हिमपात देखने को मिला यहां पर्यटकों बर्फ देख पर्यटकों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने बहुत आनंद लिया । क्योंकि स्थानीय व्यवसायी और पर्यटक दोनों ही इस बर्फबारी का इंतजार कर रहे थे क्योंकि पिछले 2 वर्षों से मसूरी में बर्फ ना पढ़ने से स्थानीय व्यवसाययों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई थी वही आज पर्यटकों ने जमकर इस बर्फबारी का लुफ्त उठाया ।
पर्यटन नगरी मसूरी में सीजन की पहली बर्फबारी होने से लोगों ने राहत की सांस ली है, लंबे इंतजार के बाद हुई बर्फबारी का जहां पर्यटक आनंद ले रहे हें वहीं व्यापारियों में भी खुशी का माहौल दिख रहा है।
पर्यटन नगरी में करीब लगभग तीन माह बाद मौसम ऐसा रुख बदला कि बिना बारिश के सीधे बर्फबारी शुरू हो गयी। हालांकि लोगों को इसका अनुमान नहीं था, गत दिवस काफी गर्म दिन रहा व लोगों को उम्मीद थी कि बर्फ नही तो बारिश जरूर होगी लेकिन सुबह जब लोग उठे तो बाहर बर्फबारी गिरती देख खुशी से झूम उठे वहीं इन दिनों मसूरी घूमने आये पर्यटक तो हैरान थे व इसे सपना समझ रहे थे, उन्हें भी उम्मीद नहीं थी कि सुबह बर्फ देखने को मिलेगी। उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। वही इस बार मौसम विभाग की जानकारी भी सटीक साबित हुई है और मसूरी के साथ ही धनोल्टी, चकराता, क्षेत्र में जमकर बर्फबारी हो रही है व करीब 6-8 इंच तक बर्फ जम गयी है वहीं लाल टिब्बा, हाथी पांव, जार्ज एवरेस्ट सहित उंचाई वाले स्थानों पर करीब छह इंच बर्फ पड़ चुकी है वहीं मालरोड पर करीब तीन इंच बर्फ पड़ चुकी है। अचानक हुई बर्फबारी से पर्यटक बेहद खुश है और अभी भी बर्फबारी जारी है बर्फबारी का पर्यटक जमकर आनंद ले रहे हैं और भारी संख्या में पर्यटकों के मसूरी पहुंचने की संभावना है, कई दिनों से लगातार चटक धूप खिलने के बाद आज सुबह जब लोग अपने घरों से उठे तो बाहर का नजारा देखकर अचंभित हो गए, पूरे शहर ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली सूचना मिलते ही काफी संख्या में बर्फबारी का नजारा देखने के लिए पर्यटकों के मसूरी पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया।

इसी बीच देहरादून से मसूरी को आते हुए कई वाहनों की एक लंबी कतार सी दिख रही है जो कि पहाड़ों की रानी मसूरी की एक अपनी पहचान है जहां पर पिछले दो सालों से बर्फ ना पढ़ने से लोगों के चेहरे पर मायूसी थी वहीं पर पहाड़ों की रानी मसूरी ने अपना प्राकृतिक स्वरूप बदलकर यह दर्शाया कि उसे पहाड़ों की रानी आखिर क्यों कहा जाता है । पहाड़ों की सुंदरता को देखने ही पर्यटक यहां आते हैं और यहां के व्यवसाययों का व्यवसाय भी पर्यटकों पर ही निर्भर है रहता है । आज इस सुंदर दृश्य को देखकर पर्यटकों और स्थानीय व्यवसाययों के चेहरे खिल उठे ।
वहीं दूसरी तरफ अब संबंधित विभागों को भी सतर्क हो जाना चाहिए क्योंकि बर्फबारी में पर्यटकों के जाम में फंसने या पेङो के गिरने,बिजली गुल हो जाने इत्यादि की समस्याएं समानता अत्यधिक होती है ।
