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July 18, 2026

लेक्चर सीरीज के 89 संस्करण में लेखक अनिल रतूड़ी (पूर्व डीजीपी) की दो पुस्तकों भंवर एक प्रेम कहानी व खाकी पर चर्चा की गयी

मसूरी। मसूरी हेरिटेज सेंटर के तत्वाधान में आयोजित लंढौर लेक्चर सीरीज के 89 संस्करण में पूर्व डीजीपी अनिल रतूडी के उपन्यास भंवर एक प्रेम कहानी व खाकी में स्थित प्रज्ञ पर चर्चा की गयी व इस पुस्तकों के बारे में मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने उनके लेखन व पुस्तक के बारे में सवाल किए। जिसका उन्होंने विस्तार से उत्तर दिए।

तिलक मेमोरियल लाइब्रेरी सभागार में आयोजित लंढौर लेक्चर सीरीज में पुस्तक के लेखक अनिल रतूड़ी से पुस्तक लिखने की प्रेरणा, उसके पात्रों व उददेश्य आदि के बारे में विस्तार से प्रश्न पूछे जिस पर उन्होंने बताया कि भंवर एक प्रेम कहानी एक आईएएस के जीवन पर लिखा गया उपन्यास है तथा खाकी में स्थित प्रज्ञ उनके पुलिस जीवन के संस्मरणों व अनुभवों के बारे में लिखा गया है। इस मौके पर पूर्व डीजीपी अनिल रतूडी ने बताया कि तिलक लाइब्रेरी से उनका पुराना संबंध रहा है व बचपन में वे यहां पढने आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेरा उपन्यास 2022 में भंवर एक प्रेम कहानी व खाकी में स्थित प्रज्ञ जिसमें सेवा काल के संस्मरण है। जिनका 2024 में लोकार्पण हुआ था। उन्होंने कहा कि प्रथम उपन्यास एक आईएएस के तीस वर्षों की कहानी है व दूसरी पुस्तक उनके जीवन में अनुभवों व संस्मरणों की कहानी है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही वह दो अन्य पुस्तकों पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों के लिए संदेश दिया कि अधिकारी भारतीय संविधान के तहत कार्य करें जन सेवा का भाव मन में रखे व विनम्र रहें। उन्होंने कहा कि पुलिस का कार्य आसान नहीं है उसमें चुनौतियां रही है लेकिन उसमें आदर्श की ओर जाने का प्रयास निरंतर रहना चाहिए। इस मौके पर मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूडी ने कहा कि अनिल रतूडी की कहानी काफी रोचक है, एक उपन्यास है व एक संस्मरण पर आधारित है। दोनों पुस्तकों के तीन संस्करण छप चुके हैं। उन्होंने आईएस अधिकारियों को संदेश दिया कि भारत एक प्रजातंत्र देश है जिसमें चुनी सरकार होती है, जो अधिकारी जनता के साथ रहते है वह सफल होते हैं, राजनीतिक दबाव तब होता है जब कार्य नहीं होता जो जनता के बीच रहकर कार्य करते है उनपर कोई दबाव नहीं रहता। इस मौके पर मसूरी हेरिटेज सेंटर की अध्यक्ष सुरभि अग्रवाल ने बताया कि लंढौर लेक्चर सीरीज का यह 89वां संस्करण है, उन्होंने कहा कि मसूरी एक एजुकेटेडो का शहर रहा है, इसमें तिलक लाइब्रेरी का मुख्य आधार रहा है, लेकिन अब यहां कम लोग आते है व हमारा उददेश्य है कि बच्चे यहां आये व अध्ययन करें। हमारे शहर में टेलेंट बहुत है। उन्होंने कहा कि लेक्चर सीरीज को 14 वर्ष हो चुके है वह चाहती है कि मसूरी में नये साहित्यकार आयें, वहीं मसूरी में अनेक ख्याति प्राप्त लेखकों का शहर रहा है यह केवल पर्यटक स्थल नहीं है यह बुद्धिजीवियों का शहर है। कार्यक्रम में लेखक अनिल रतूडी ने अपनी दोनों पुस्तकों की एक एक प्रति लाइब्रेरी को भी भेंट की जिससे पाठक इसे पढ सकें। इस मौके पर प्रोफेसर किरन सूद, बीना गुनसोला, नीता रावत, संगीता लेखवार, शूरवीर भंडारी, आदि मौजूद रहे।

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