पालिका सभासदों ने एनसीसी की बाध्यता में ढील देने के लिए उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन भेजा।
मसूरी । पहाड़ों की रानी मसूरी में विकराल रूप ले चुकी पार्किंग और जाम की समस्या से निपटने के लिए कवायद तेज हो गई है। नगर पालिका सभासदों ने निजी भूखंडों पर पार्किंग निर्माण की अनुमति देने और इसके लिए एनसीसी (विशेष निर्माण अनुमति/अनापत्ति) की अनिवार्यता में शिथिलता बरतने की मांग उठाई है। इस संबंध में सभासदों ने एसडीएम के माध्यम से प्रदेश के मुख्य सचिव और संबंधित उच्चाधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा है।
पालिका सभासद पवन थलवाल और विशाल खरोला ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि शहर में पार्किंग स्थलों की भारी कमी है, जिसका सीधा असर स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों पर पड़ता है। वीकेंड और मुख्य पर्यटन सीजन में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। सभासदों का तर्क है कि यदि प्रशासन निजी भूखंड स्वामियों को पार्किंग विकसित करने की अनुमति देता है, तो शहर को बिना अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण के तुरंत नई पार्किंग क्षमता मिल सकेगी।
प्रशासन ने चिह्नित किए 64 संभावित स्थल
ज्ञापन प्राप्त होने के बाद उपजिलाधिकारी (एसडीएम) राहुल आनंद ने बताया कि मसूरी में पार्किंग का मुद्दा बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है।
पार्किंग से जुड़ा प्रवेश पंत बनाम स्टेट का मामला पहले से ही उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
गृह सचिव और आवास सचिव के निर्देशों के तहत मसूरी में पार्किंग स्थलों की पहचान की गई है।
सर्वे के दौरान 5 सरकारी और 6 निजी बड़े पार्किंग स्थलों के अलावा विभिन्न क्षेत्रों में 53 अन्य भूखंडों को पार्किंग के लिए उपयुक्त पाया गया है।
शासन स्तर पर तय होगा भविष्य का रास्ता
एसडीएम राहुल आनंद ने कहा कि इन सभी स्थलों की विस्तृत रिपोर्ट शासन को प्रेषित कर दी गई है। अब निर्णय शासन स्तर पर लिया जाना है कि संबंधित क्षेत्रों को अधिसूचित, अधिसूचना से मुक्त अथवा ‘मुक्त क्षेत्र’ घोषित करके एनसीसी की तकनीकी बाध्यताओं को कैसे सरल किया जाए।
सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक और जूझते पर्यटकों के बीच अब शहरवासियों और कारोबारियों की नजरें शासन के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
